Trump Visa Rules: विदेश में नौकरी-पढ़ाई पर असर! ट्रंप के नए नियमों से भारतीय IT प्रोफेशनल्स और छात्रों को बड़ा झटका

Trump Visa Rules
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USA Student Visa Update: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन रोजगार और स्टूडेंट वीजा से जुड़े कई नियमों में बदलाव की तैयारी कर रहा है। इन बदलावों का सबसे ज्यादा असर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, छात्रों और अमेरिका में काम कर रही भारतीय कंपनियों पर पड़ सकता है, क्योंकि H-1B और स्टूडेंट वीजा का सबसे अधिक इस्तेमाल भारतीय करते हैं। आइए जानते हैं कि नए प्रस्तावित नियम क्या हैं और इनका क्या असर होगा।

H-1B वीजा नियम होंगे और सख्त

अगर कोई कंपनी अपने H-1B कर्मचारी को किसी दूसरी कंपनी (थर्ड-पार्टी क्लाइंट) के यहां काम करने भेजती है, तो अब उसे ज्यादा दस्तावेज और सबूत देने होंगे। कंपनी को यह साबित करना होगा कि कर्मचारी वास्तव में उसी कंपनी के लिए काम कर रहा है। कंपनी और कर्मचारी के बीच वास्तविक नियोक्ता-कर्मचारी (Employer-Employee) संबंध है। कर्मचारी विशेष और वैध कार्य कर रहा है। जिन कंपनियों ने पहले नियमों का सही पालन नहीं किया है, उनके वीजा आवेदनों की अधिक सख्ती से जांच की जा सकती है।

वीजा रिन्यू कराना होगा महंगा

नए प्रस्ताव के अनुसार अब कंपनियों को सिर्फ नए H-1B या L-1 कर्मचारी पर ही नहीं, बल्कि वीजा रिन्यू कराने पर भी अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। इसके अलावा विदेशी कर्मचारियों को पहले से अधिक वेतन देना पड़ सकता है। कंपनियों की भर्ती लागत बढ़ जाएगी। भारतीय IT कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।

ग्रीन कार्ड नियमों में भी बदलाव

ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले लेबर सर्टिफिकेशन सिस्टम को भी अपडेट किया जा रहा है। नए नियमों के तहत अगर कोई कंपनी विदेशी कर्मचारी को ग्रीन कार्ड स्पॉन्सर करना चाहती है, तो पहले यह देखना होगा कि कंपनी ने हाल ही में कर्मचारियों की छंटनी तो नहीं की है। इसका उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों के रोजगार के अवसरों की सुरक्षा करना है।

भारतीय छात्रों के लिए क्या बदलेगा?

अमेरिका में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों पर भी नए नियमों का असर पड़ सकता है। प्रस्ताव के मुताबिक स्टूडेंट वीजा अब अधिकतम 4 साल के लिए जारी किया जा सकता है। यदि पढ़ाई 4 साल से अधिक चलती है, तो छात्रों को वीजा अवधि बढ़वाने के लिए अलग से आवेदन करना होगा। फिलहाल अमेरिका में करीब 3.60 लाख भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं, जो वहां के कुल विदेशी छात्रों का लगभग 31% हैं।

पढ़ाई के बाद नौकरी करना भी हो सकता है मुश्किल

पढ़ाई पूरी होने के बाद मिलने वाली वर्क ट्रेनिंग (OPT) व्यवस्था की भी समीक्षा प्रस्तावित है। यदि इसमें बदलाव होता है, तो भविष्य में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए अमेरिका में नौकरी करना पहले की तुलना में कठिन हो सकता है।

H-4 वीजा वालों को भी झटका

H-1B वीजा धारकों के पति या पत्नी, जो H-4 वीजा पर अमेरिका में काम करते हैं, उनके लिए भी नियम बदल सकते हैं। अभी तक यदि वर्क परमिट रिन्यूअल का आवेदन लंबित रहता था, तो उन्हें ऑटोमैटिक एक्सटेंशन मिल जाता था और वे काम जारी रख सकते थे। नए प्रस्ताव के तहत ऑटोमैटिक एक्सटेंशन खत्म हो सकता है। वर्क परमिट की अवधि खत्म होते ही नौकरी रोकनी पड़ सकती है। नया परमिट मिलने के बाद ही दोबारा काम शुरू किया जा सकेगा।

H-1B Visa Renewal: भारतीय कंपनियों पर क्या असर पड़ेगा?

अगर ये नियम लागू होते हैं, तो H-1B कर्मचारियों को अमेरिका भेजना महंगा होगा। वीजा प्रक्रिया लंबी और जटिल हो सकती है। IT आउटसोर्सिंग कंपनियों की लागत बढ़ेगी। भर्ती और प्रोजेक्ट प्लानिंग प्रभावित हो सकती है।

छात्रों और प्रोफेशनल्स को क्या करना चाहिए?

इमिग्रेशन विशेषज्ञों का कहना है कि इन प्रस्तावित बदलावों को पूरी तरह लागू होने में अभी कुछ समय लग सकता है। फिर भी छात्र अपनी पढ़ाई और वीजा की योजना पहले से बनाएं। H-1B कर्मचारी और कंपनियां जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखें। वीजा और इमिग्रेशन से जुड़े आधिकारिक अपडेट पर नजर रखें।

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