कांकेर। कांकेर जिले के करीब 25 गांवों में नदी किनारे तेजी से हो रहे मिट्टी कटाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। महानदी और उसकी सहायक नदियों के लगातार कटाव के कारण हर साल बड़ी मात्रा में कृषि भूमि नदी में समा रही है। इससे किसानों की उपजाऊ जमीन सिकुड़ती जा रही है और कई परिवारों की आजीविका पर संकट गहरा गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ कटाव और तेज हो जाता है। कई स्थानों पर खेतों का बड़ा हिस्सा नदी में बह चुका है, जबकि कुछ गांवों में कटाव आबादी क्षेत्र तक पहुंचने लगा है। किसानों ने प्रशासन से तटबंध निर्माण और स्थायी सुरक्षा उपाय करने की मांग की है, ताकि उनकी जमीन और गांवों को बचाया जा सके।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से समस्या बनी हुई है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि नदी में समा सकती है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
