बेकाबू ट्रेलर ने मवेशियों को रौंदा, 9 की मौत:बिलासपुर-कोरबा नेशनल हाईवे पर हादसा; हाईकोर्ट ने सरकार से कहा था- प्रभावी कदम उठाइए

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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में मंगलवार को तेज रफ्तार ट्रेलर ने मवेशियों के झुंड को कुचल दिया। बिलासपुर-कोरबा नेशनल हाईवे पर हुए हादसे में 9 मवेशियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक मवेशी गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना कोनी थाना क्षेत्र की है।

1 साल में मवेशियों के कुचले जाने की यह चौथी बड़ी घटना है। इससे पहले जुलाई 2025 में मस्तूरी-रायपुर नेशनल हाईवे पर अज्ञात वाहन ने 23 गायों को कुचल दिया था, इनमें से 18 गायों की मौत हुई थी। इस घटना से पहले बिलासपुर-रायपुर हाईवे पर ट्रक ने 15 गायों के ऊपर गाड़ी चढ़ा दी थी, हादसे में सभी गायों की मौत हो गई थी।

वहीं, सितंबर 2025 में रतनपुर रोड पर तेज रफ्तार ट्रक ने गायों के झुंड को रौंद दिया था। इसमें एक गर्भवती गाय समेत 8 गायों की जान चली गई। गर्भवती गाय का पेट फट गया था, जिससे बछड़ा बाहर आ गया था। इन सभी बड़ी घटनाओं पर हाईकोर्ट सख्ती दिखा चुका है। इसके अलावा भी प्रदेश में कई हादसे आए दिन होते रहते हैं।

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मृत 9 मवेशियों का अंतिम संस्कार

बुधवार सुबह गतौरी के पास ग्रामीणों और राहगीरों ने सड़क पर लहूलुहान पड़े मवेशियों को देखा और इसकी सूचना पुलिस व गौसेवकों को दी।

मौके पर पहुंची टीम ने गौसेवकों की मदद से घायल नंदी का रेस्क्यू कर उसे छतौना स्थित गौरी गोपाल गौसेवा धाम भेजा, जहां उसका उपचार जारी है। वहीं, मृत 9 मवेशियों का गौसेवकों ने अंतिम संस्कार किया।

हाईकोर्ट में लगातार सुनवाई जारी

दरअसल, सड़कों पर आवारा मवेशियों के जमावड़े को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर लगातार सुनवाई चल रही है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट कई बार राज्य सरकार और एनएचएआई पर नाराजगी जता चुका है।

हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव और एनएचएआई के अधिकारियों को मवेशियों को सड़कों पर आने से रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश भी दिए हैं। इसके बावजूद हाईवे पर मवेशियों की मौजूदगी कम नहीं हो रही है और लगातार हादसे हो रहे हैं।

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फेंसिंग, स्पीड लिमिट और गौ एम्बुलेंस की मांग

4 अगस्त को हुए हादसे के बाद सामाजिक संगठनों और गौसेवकों ने नेशनल और स्टेट हाईवे पर गौ सुरक्षा फेंसिंग लगाने की मांग उठाई। गौसेवकों का कहना है कि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो ऐसे हादसे आगे भी होते रहेंगे।

साथ ही दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में गति सीमा निर्धारित करने, प्रत्येक जिले में गौ एम्बुलेंस की व्यवस्था करने और आवारा मवेशियों के लिए पर्याप्त शेड व चारे की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की।

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