दो राज्यों की पुलिस एक 400 साल पुरानी चोरी की गई तोप को ढूंढने में लगी है. पुलिस और प्रशासन की टीमें पिछले दो दिनों से कई जगहों पर खुदाई कर चुकी हैं मगर उनके हाथ कुछ नहीं लगा. 50 से ज्यादा पुलिसकर्मी और कई जेसीबी मशीनों को काम पर लगाया गया है. अब सवाल ये है कि आखिर 3500 किलो की तोप अचानक रातों रात कहां गायब हो गई?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 15 जुलाई की रात को ये मध्य प्रदेश के शिवपुरी स्थित नरवर किले से चोरी हुई थी. अब खबर मिली है कि इस ऐतिहासिक तोप को एक लोडिंग वाहन में भरकर राजस्थान के करौली जिले ले गए हैं. तभी से राजस्थान पुलिस और मध्य प्रदेश पुलिस जांच में जुटी है.
कहां चल रही खुदाई?
सिंधिया राजवंश काल की ये ऐतिहासिक तोप नरवर किले से चोरी हुई है. वहां करीब 14 तोपें रखी हुईं थीं, जिनमें से अब 13 तोपें ही बची हैं. करौली जिले के हिंडौन सदर पुलिस थाना के SHO गिरिराज प्रसाद ने बताया कि तोप को गांवड़ा मीना गांव ले जाया गया है. उन्होंने ये जानकारी शिवपुरी पुलिस थाना को दी. नरवर किले से गांवड़ा मीना गांव के बीच की दूरी 250 किलोमीटर है.
रिपोर्ट के मुताबिक SHO ने कहा,
‘पुलिस और प्रशासन की टीमें गांव में कई जगहों पर खुदाई कर रही हैं. हम हर उस जगह पर जांच कर रहे हैं जहां मिट्टी पहले से खुदी हुई है. 22 जुलाई को रात भर खुदाई हुई है और अगले दिन भी दोपहर दो बजे तक ये जारी रही.’
भरतपुर से एक मेटल डिटेक्टर टीम भी तोप की तलाश में मौके पर पहुंची. सुरक्षा के गांव में पुलिस बल को तैनात किया गया है. वहीं, गांववाले इस बात से खुश नहीं हैं.
कैसे हुई चोरी?
15 जुलाई की रात को बदमाशों ने नरवार किले के खुले प्रांगण से 16वीं सदी की एक ऐतिहासिक तोप चोरी की. अंतरराष्ट्रीय प्राचीन वस्तुओं के काले बाजार में इसकी कीमत 3-5 करोड़ रुपये हो सकती है. जांचकर्ताओं का कहना है कि चोरों ने सबसे पहले तोप को गद्दों में लपेटा. फिर बियरिंग लगी लोहे की ट्रॉली की मदद से उसे लगभग 3 हजार फीट नीचे उतारा. इसके बाद उसे एक लोडिंग वाहन पर लादकर वे फरार हो गए.
रिपोर्ट में कहा गया है कि किले पर कुल छह सिक्योरिटी गार्ड तैनात रहते हैं. चार दिन में और दो रात में. मगर उस दिन किले की निगरानी कोई नहीं कर रहा था. चोरों ने इसका फायदा उठाया और अपने प्लान को अंजाम दिया. किले के बाहर भारी वाहनों के टायरों के निशान मिले हैं.

