E-20 पेट्रोल से खराब हुई कार, निर्माता कंपनी को नई गाड़ी या 21.60 लाख रुपए लौटाने का आदेश

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रायपुर। राजधानी रायपुर के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (अतिरिक्त पीठ) ने एथेनॉल मिश्रित (E-20) पेट्रोल के कारण कार खराब होने के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कून्डु और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीस की पीठ ने माना कि कार का इंजन E-20 पेट्रोल को सपोर्ट नहीं कर रहा था, जिसके चलते गाड़ी बार-बार खराब हो रही थी। फोरम ने कार डीलर और निर्माता कंपनी को कड़ी फटकार लगाते हुए पीड़ित डॉक्टर को 45 दिनों के भीतर E-20 सपोर्ट करने वाली उसी मॉडल की नई कार देने या फिर वाहन की पूरी कीमत ₹20,50,494 लौटाने का आदेश दिया है। साथ ही मानसिक प्रताड़ना के एवज में एक लाख रुपए और वाद व्यय के रूप में 10,000 (कुल करीब ₹21.60 लाख) का भुगतान करने कहा है। तय समय सीमा में भुगतान न करने पर सात फीसदी की दर से ब्याज भी देय होगा।

जानिए पूरा मामला

सड्डू (रायपुर) निवासी डॉ. प्रेमराज देवता ने 3 जून 2024 को एक ‘ग्रैंड विटारा’ कार खरीदी थी। महज कुछ महीनों बाद 11 नवंबर 2024 को कार में अचानक तकनीकी खराबी आई। जब वे गाड़ी को कंपनी के आधिकारिक वर्कशॉप ले गए तो उन्हें बताया गया कि मिलावटी पेट्रोल के कारण यह समस्या आई है। वर्कशॉप द्वारा बार-बार रिपेयरिंग करने और पेट्रोल टंकी साफ करने के बावजूद कार लगातार खराब होती रही। इस दौरान डीलर और निर्माता कंपनी ने कार में किसी भी तरह की निर्माणगत त्रुटि होने से साफ इनकार कर दिया।

बार-बार की खराबी से परेशान होकर डॉ. देवता ने पेट्रोल का सैंपल लेकर मान्यता प्राप्त एसजीएस लैब में जांच कराई। लैब रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि पेट्रोल गुणवत्ताहीन नहीं था, बल्कि वह इंजन के अनुकूल (कंफर्टेबल) नहीं था, जिसके कारण इंजन बार-बार चोक हो रहा था। दूसरी ओर, जब उन्होंने पेट्रोल पंप से संपर्क किया तो पता चला कि किसी अन्य वाहन मालिक ने ऐसी कोई शिकायत नहीं की थी। जब कंपनी ने कार की री-सेल वैल्यू का मूल्यांकन महज ₹12 लाख लगाया, तो कोई रास्ता न देख पीड़ित डॉक्टर ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया।

देश का पहला और नजीर बनने वाला फैसला

आयोग ने माना कि उपभोक्ता की कोई गलती नहीं थी। वाहन का इंजन देश में सप्लाई हो रहे E-20 पेट्रोल के अनुकूल नहीं था। ऐसे में यह निर्माता और डीलर की जिम्मेदारी है कि वे ग्राहक को सही उत्पाद मुहैया कराएं। वर्तमान में केंद्र सरकार की नीति के तहत देश में E-20 पेट्रोल (20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल का मिश्रण) को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता और प्रदूषण को कम किया जा सके। हालांकि, इस ईंधन को लेकर कुछ वाहन मालिकों द्वारा इंजन परफॉर्मेंस और माइलेज को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं। रायपुर का यह फैसला ऑटोमोबाइल सेक्टर और उपभोक्ताओं के अधिकारों के लिहाज से एक बड़ी नजीर साबित होगा।

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