Chhattisgarh Government: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में कभी हिंसा और भय के माहौल में जीवन बिताने वाले पुनर्वासित युवाओं की जिंदगी अब पूरी तरह बदल रही है। जो हाथ कभी बंदूक उठाने को मजबूर थे, आज वही हाथ वाहन की स्टेयरिंग थामकर सम्मानजनक जीवन की ओर बढ़ रहे हैं। जिला प्रशासन और ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) की पहल से 31 पुनर्वासित युवाओं को एलएमवी (लाइट मोटर व्हीकल) ऑनर ड्राइवर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसरों से जुड़ सकें।
Sukma Driver Training: 30 दिनों का विशेष प्रशिक्षण अभियान
13 जून से 12 जुलाई तक चल रहे इस 30 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का उद्देश्य युवाओं को केवल वाहन चलाना सिखाना नहीं, बल्कि उन्हें एक कुशल और जिम्मेदार चालक के रूप में तैयार करना है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को एलएमवी (लाइट मोटर व्हीकल) चलाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण, सड़क सुरक्षा के नियम, यातायात कानूनों की जानकारी, रोड संकेतों की पहचान, वाहन की सामान्य खराबी दूर करने और रखरखाव का प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी जा रही है।
प्रशिक्षण के बाद मिलेगा ड्राइविंग लाइसेंस
इस पहल की खास बात यह है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद जिला प्रशासन सभी 31 प्रतिभागियों का वैध ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवाएगा। इससे युवा प्रशिक्षण खत्म होते ही निजी कंपनियों, परिवहन सेवाओं या स्वयं का वाहन चलाकर रोजगार शुरू कर सकेंगे।
युवाओं में लौटा आत्मविश्वास
प्रशिक्षण में शामिल पुनर्वासित युवाओं का कहना है कि इस पहल ने उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई है। प्रशिक्षणार्थी सोड़ी सोमड़ी बताती हैं कि पहले भविष्य को लेकर काफी असमंजस था, लेकिन अब उन्हें विश्वास है कि वे अपने परिवार का सहारा बन सकेंगी। उनके मुताबिक यह प्रशिक्षण केवल ड्राइविंग सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मान के साथ जीने का अवसर भी दे रहा है। वहीं पुनेम ज्योति का कहना है कि ड्राइविंग कौशल भविष्य में उनके लिए स्थायी रोजगार का मजबूत आधार बनेगा। इससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी और बेहतर जीवन जी पाएंगी।
मुख्यधारा से जोड़ने की पहल
सुकमा जिला प्रशासन का मानना है कि पुनर्वास केवल नक्सल प्रभावित युवाओं को हिंसा से दूर लाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें सम्मानजनक रोजगार और बेहतर भविष्य का अवसर भी मिलना चाहिए। इसी सोच के साथ प्रशासन लगातार कौशल विकास और स्वरोजगार आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम चला रहा है, ताकि पुनर्वासित युवा समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
कलेक्टर ने बताई पहल की सोच
कलेक्टर अमित कुमार ने कहा कि जिला प्रशासन का लक्ष्य पुनर्वासित युवाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। यदि सही मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और अवसर मिले तो कोई भी व्यक्ति अपने जीवन की नई शुरुआत कर सकता है। उन्होंने कहा कि आरसेटी की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियों से निकलकर भी युवा आत्मनिर्भर बन सकते हैं और समाज में सम्मानजनक स्थान हासिल कर सकते हैं।
बदलाव की नई मिसाल बन रहा सुकमा
सुकमा जैसे नक्सल प्रभावित जिले में यह पहल केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की मजबूत तस्वीर पेश कर रही है। यहां अब बंदूक की जगह स्टेयरिंग ने ले ली है और डर की जगह आत्मविश्वास ने। आज ये युवा सिर्फ वाहन नहीं चला रहे, बल्कि अपने जीवन को नई दिशा और नई मंजिल की ओर ले जा रहे हैं। यह पहल बताती है कि अवसर, प्रशिक्षण और विश्वास मिल जाए तो बदलाव संभव है और पुनर्वास की राह सफलता तक पहुंच सकती है।

