उतरना था नया बस स्टैण्ड, शिक्षक को नींद में गोविंदपुर ले गई मौत!

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मौत कब और किस रूप में सामने आ जाए, इसका कोई भरोसा नहीं. कांकेर में हुई सड़क दुर्घटना में एक शिक्षक की दर्दनाक मौत हो गई. कोंडागांव से कांकेर आने के दौरान बस में नींद लग जाने के कारण शिक्षक नए बस स्टैंड पर नहीं उतर सके और बस उन्हें गोविंदपुर ले गई. वहां बस से उतरने के कुछ देर बाद अज्ञात वाहन की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई. जानकारी के अनुसार अलबेला पारा शहीद कॉलोनी निवासी चंद्र हुलास ठाकुर,

बड़े बंजोड़ा हाईस्कूल कोंडागांव में प्रभारी प्राचार्य थे. घर से किसी कार्य की सूचना मिलने के बाद वे कोंडागांव से बस में सवार होकर कांकेर के लिए रवाना हुए थे. रास्ते में उन्होंने अपने पुलिसकर्मी मित्र को फोन कर कांकेर के नए बस स्टैंड पहुंचने और वहां से उन्हें घर ले जाने के लिए कहा था.

पुलिसकर्मी मित्र निर्धारित समय पर नए बस स्टैंड पहुंच गया और बस का इंतजार करने लगा. कुछ देर बाद संबंधित बस बस स्टैंड पहुंची और वहां से रवाना भी हो गई, लेकिन चंद्र हुलास ठाकुर बस से नहीं उतरे. बताया जा रहा है कि सफर के दौरान उनकी आंख लग गई थी. जब नींद खुली तो बस कांकेर से आगे निकलकर गोविंदपुर पहुंच चुकी थी.इसके बाद शिक्षक गोविंदपुर में बस से उतर गए और अपने मित्र को फोन कर वहां बुलाया. मित्र उन्हें लेने के लिए गोविंदपुर रवाना हो गया. इसी दौरान कुछ ही देर बाद ठाकुर के मोबाइल नंबर से फिर फोन आया. मित्र ने फोन उठाया तो दूसरी ओर एक राहगीर था.

उसने बताया कि सड़क पर एक व्यक्ति को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी है और उसकी हालत गंभीर है.सूचना मिलते ही पुलिसकर्मी मित्र गोविंदपुर स्थित गुरुद्वारा के पास पहुंचा. वहां चंद्र हुलास ठाकुर सड़क पर मृत पड़े थे. अज्ञात वाहन की ठोकर से उनकी मौके पर ही मौत हो चुकी थी. घटना की सूचना पुलिस को दी गई. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा.

पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया. इसके बाद अंतिम संस्कार के लिए शव उनके गृहग्राम खैरताल, बलौदाबाजार ले जाया गया. पुलिस ने परिजनों की रिपोर्ट पर अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और अन्य माध्यमों से वाहन की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है.

चंद्र हुलास ठाकुर की अचानक हुई मौत से परिवार, परिचितों और शिक्षा जगत में शोक की लहर है. कांकेर आने के लिए शुरू हुआ उनका सफर नींद के कारण गोविंदपुर तक पहुंचा और कुछ ही देर बाद हादसे में उनकी जिंदगी का सफर हमेशा के लिए थम गया

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