Chhattisgarh Teacher Recruitment 2026: छत्तीसगढ़ में शिक्षक भर्ती परीक्षा 2026 को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। भर्ती परीक्षा का विज्ञापन जारी होते ही अभ्यर्थी परीक्षा के लिए बने नियम और शर्तों का विरोध कर रहे हैं। जहां एक तरफ वर्षों बाद हिंदी और संस्कृत के पदों पर शिक्षकों की भर्ती को लेकर खुशी है। वहीं दूसरी ओर व्यायाम और विज्ञान विषय के पद पर भर्ती नहीं होने से युवाओं में भारी नाराजगी देखी जा रही है। नया रायपुर में इसे लेकर विरोध प्रदर्शन भी चल रहा है। अभ्यर्थियों में सबसे ज्यादा आपत्ति इस भर्ती परीक्षा में 50% अंक की अनिवार्यता को लेकर हैं। उनका कहना है की भर्ती परीक्षा में बदले हुए नियम और शर्तों की वजह से बड़ी संख्या में
राज्य सरकार ने पिछले वर्ष पांच हजार पदों पर शिक्षकों की भर्ती करने की घोषणा की थी। इसमें व्यायाम और विज्ञान का पद भी शामिल था, लेकिन इस बार के शिक्षक भर्ती में इन दोनों पदों को नहीं रखा गया है। कुल 1654 पदों पर शिक्षकों की भर्ती की जा रही है। इसके बावजूद इन दो विषयों के पद पर शिक्षकों की भर्ती नहीं किये जाने से युवाओं में आक्रोश है। व्यायाम और विज्ञान शिक्षक का एक भी पद नहीं होने से युवाओं में बेहद नाराजगी है। जारी किए गए विज्ञापन के अनुसार, सहायक शिक्षक के लिए 12वीं और शिक्षक के लिए ग्रेजुएशन में 50% अंक होना जरूरी है। मामले में युवाओं का कहना है कि पिछली बार हुई भर्ती परीक्षा में पांच प्रतिशत की छूट मिली थी, जिसकी वजह से 45% तक अंक लाने वाले विद्यार्थियों को भी इसका लाभ मिला था और वो भी परीक्षा में शामिल हुए थे। इस बार की भर्ती परीक्षा के विज्ञापन में इस तरह का छूट नहीं दिए जाने से बड़ी संख्या में आरक्षित वर्ग के लोग (एसटी,एससी और ओबीसी) परीक्षा देने से वंचित रह जाएंगे।
इस मामले में भर्ती परीक्षा एक्सपर्ट का कहना है की परीक्षा के लिए बनाए गए नियमों और शर्तों की वजह से युवाओं में निराशा है। शिक्षक भर्ती 2026 के तहत और संस्कृत विषय के लिए 550 पदों पर भर्ती की जाएगी। इनमें हिंदी के 250 और संस्कृत के 300 पदों पर भर्ती की जाएगी। व्याख्याता पदों पर भी इन दो विषयों को लेकर 200 से ज्यादा पद भरे जाने की उम्मीद है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी मंडल इस संबंध में जल्द ही आवेदन की प्रक्रिया शुरू करेगा। बता दें कि राज्य गठन के बाद वर्ष 2005, 2008 और 2011 में जिला पंचायत के माध्यम से शिक्षाकर्मियों की भर्ती की गई थी। इसके बाद वर्ष 2019 में भी शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला गया था। साल 2023 में भी करीब 12 हजार पदों को लेकर वैकेंसी आई थी। इसमें हिंदी और संस्कृति के पद शामिल नहीं थे।
इस संबंध में एनएसयूआई के प्रभारी महांमंत्री हेमंत पाल ने कहा कि सरकार की कथनी और करनी में बहुत फर्क है। पहले पांच हजार शिक्षकों की भर्ती का विज्ञापन निकाला गया था। इसमें भी व्यायाम और विज्ञान शिक्षक की भर्ती की बात कही गई थी, लेकिन 1650 से ज्यादा शिक्षकों की भर्ती का विज्ञापन आया है, इसमें भी यही हालत है। जो नियम और शर्तें बताए गए हैं, वह छात्रों के हित में नहीं है। वहीं एनएसयूआई के रायपुर ग्रामीण उपाध्यक्ष अंकित बंजारे ने कहा कि कोई नियम थोपना नहीं चाहिये। सरकार को अभ्यर्थियों के हित में कदम उठाना चाहिये। सरकार एसटी, एससी और ओबीसी वर्ग की उपेक्षा कर रही है।

