दशहरे पर जब देश के हर कोने में रावण के पुतले जलाए जाते हैं, उसी देश में कई ऐसे गांव भी हैं जिनकी पहचान ही रावण के नाम से है. यह सुनने में अजीब जरूर लगता है, लेकिन जनगणना के पुराने रिकॉर्ड इस बात की गवाही देते हैं. भारत के अलग अलग राज्यों में रावण नाम से मिलते जुलते गांव आज भी मौजूद हैं.
34 गांव और इलाके दर्ज 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित एक वेबसाइट के अनुसार देशभर में Rawan नाम या इससे जुड़े करीब 34 गांव और इलाके दर्ज हैं. इनमें राजस्थान का नंबर सबसे ऊपर है. इसके बाद उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पंजाब, बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में भी ऐसे नाम मिलते हैं. हालांकि यह आंकड़ा 14 साल पुराना है. माना जा रहा है कि अब तक इनमें बदलाव भी आ चुका होगा.
छत्तीसगढ़ में इस तरह के 7 स्थान दर्ज हैं. इनके नाम सुनकर ही उत्सुकता बढ़ जाती है. भेजरी रावण, रावण खोंद्रा, रावण, सावन रावण जैसे नाम इसी सूची में आते हैं. राजधानी रायपुर में भी Rawan नाम से एक से ज्यादा रिकॉर्ड मिलते हैं. वहीं मध्य प्रदेश में विदिशा जिले में Rawan नाम का एक गांव अलग से दर्ज है.उत्तर प्रदेश में ऐसे 6 गांव हैं, पंजाब में 3, बिहार और हरियाणा में 2-2 स्थान इस सूची में शामिल हैं. राजस्थान में सबसे ज्यादा संख्या है.
लेकिन सवाल यह है कि क्या ये सभी गांव लंकापति रावण के नाम पर ही बसे हैं?विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ अंग्रेजी वर्तनी Rawan को देखकर ऐसा कहना सही नहीं होगा. कई जगह स्थानीय बोली में रावण शब्द का अर्थ कुछ और भी हो सकता है. किसी जगह इसका उच्चारण अलग होता है तो किसी जगह इसका इतिहास अलग है.
जैसे छत्तीसगढ़ में कई गांवों के नाम स्थानीय नदियों, जंगलों या लोगों के नाम पर भी रखे गए हैं.दिलचस्प बात यह है कि दशहरे के दिन जहां इन गांवों के लोग भी रावण दहन देखते हैं, वहीं उनके गांव का नाम ही रावण से जुड़ा है. गांव के बुजुर्गों का कहना है कि नाम को लेकर उन्हें कभी कोई दिक्कत नहीं हुई. वे इस नाम को अपनी पहचान मानते हैं.

