बागेश्वर धाम केस में सस्पेंस बरकरार, DNA मैच नहीं फिर भी आरोपी को बेल नहीं..

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मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के बागेश्वर धाम से जुड़े एक कथित दुष्कर्म मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है. वैज्ञानिक जांच में आरोपी का DNA मैच न होने और खुद पीड़ित नाबालिग लड़की के कोर्ट में बयान से मुकर जाने के बावजूद हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है. अदालत ने इस रहस्यमयी मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए छतरपुर एसपी को विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने का आदेश दिया है, ताकि दो महीने के भीतर यह पता लगाया जा सके कि नाबालिग का यौन शोषण करने वाला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे का असली जैविक पिता आखिर कौन है?

वैज्ञानिक रिपोर्ट ने उलझाया मामला, आरोपी का DNA नहीं हुआ मैच

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 16 वर्षीय नाबालिग लड़की ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने बागेश्वर धाम में उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया था. जांच के दौरान पीड़िता दो महीने की गर्भवती पाई गई थी, जिसके बाद डॉक्टरों की सलाह पर उसका गर्भपात कराया गया और भ्रूण को फोरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया. सागर स्थित राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ कि आरोपी उस भ्रूण का जैविक पिता नहीं है. इस वैज्ञानिक रिपोर्ट के आधार पर आरोपी की तरफ से कोर्ट में जमानत की अर्जी लगाई गई थी.

पीड़िता ने कोर्ट में बदला बयान पर हाईकोर्ट नहीं माना

मामले में नया मोड़ तब आया जब पीड़िता ने ट्रायल कोर्ट के सामने गवाही देते हुए अपने पहले के बयानों से यू-टर्न ले लिया. जिरह के दौरान उसने कहा कि आरोपी ने उसके साथ कोई गलत काम नहीं किया था. हालांकि, हाईकोर्ट के जस्टिस अजय कुमार निरंकारी ने इस मामले में एक गंभीर विरोधाभास की ओर इशारा किया. कोर्ट ने दर्ज किया कि पीड़िता ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 180 और 183 के तहत दर्ज कराए गए अपने शुरुआती बयानों में साफ तौर पर आरोपी पर बागेश्वर धाम में दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था.

दो महीने के भीतर असली दोषी का पता लगाएं: कोर्ट

हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि भले ही आरोपी का DNA भ्रूण से मैच नहीं हुआ है, लेकिन यह सच है कि 16 साल की नाबालिग लड़की के साथ शारीरिक संबंध बनाए गए थे और वह गर्भवती हुई थी. अदालत ने छतरपुर के पुलिस अधीक्षक को तुरंत एक विशेष टीम बनाने का निर्देश दिया है. इस टीम को अगले दो महीनों के भीतर यह पता लगाना होगा कि नाबालिग के साथ यौन शोषण करने वाला असली गुनहगार कौन है और उस भ्रूण का असली जैविक पिता कौन है? 

धीरेंद्र शास्त्री की महिला श्रद्धालुओं को खास चेतावनी

हाईकोर्ट का यह आदेश ऐसे समय में आया है जब हाल ही में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धाम आने वाले श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की थी. उन्होंने महिलाओं से अपील की थी कि वे धाम में अकेली न आएं और वहां किसी भी अजनबी या सेवादार पर आंख बंद करके भरोसा न करें. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि वह केवल मंदिर परिसर के अंदर की सुरक्षा की जिम्मेदारी ले सकते हैं, पूरे पांच किलोमीटर के बाहरी दायरे की नहीं.

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