फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश से उम्रकैद के कैदी को छुड़ाने का आरोप, जेल DIG गिरफ्तार

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बेंगलुरु: कर्नाटक के बेंगलुरु सेंट्रल जेल से उम्रकैद की सजा काट रहे एक कैदी को कथित तौर पर फर्जी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के जरिए रिहा कराने के मामले में जेल विभाग के DIG एम. सोमशेखर को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, सोमशेखर पर कैदी की पत्नी के साथ यौन शोषण का भी गंभीर आरोप लगा है। उन्हें कोर्ट में पेश करने के बाद 9 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है।

मामला साल 2018 का है। पुलिस के अनुसार, उम्रकैद की सजा काट रहे शंकर ए. को 13 नवंबर 2018 को बेंगलुरु सेंट्रल जेल से बाहर निकाल दिया गया था। उसकी रिहाई के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश जैसा दिखने वाला एक फर्जी दस्तावेज जेल प्रशासन के सामने पेश किया गया था। बाद में जांच में इस आदेश के फर्जी होने की पुष्टि हुई।

जांच में जेल के कर्मचारी श्रीकांत एस. की भूमिका भी सामने आई। पुलिस का आरोप है कि उसने फर्जी सुप्रीम कोर्ट आदेश तैयार किया था और इसके बदले कैदी के परिवार से पैसे लिए गए। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 6 लाख रुपये दिए जाने की बात सामने आई है।

कैदी की पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप

जांच के दौरान पुलिस ने कैदी की पत्नी से पूछताछ की। उसने आरोप लगाया कि तत्कालीन जेल प्रमुख सोमशेखर ने उसके पति को जेल से बाहर निकलवाने में मदद करने के बदले उसका यौन शोषण किया। पुलिस अब इन आरोपों और मामले में अधिकारी की कथित भूमिका की जांच कर रही है।

पुलिस के अनुसार, सोमशेखर उस समय बेंगलुरु सेंट्रल जेल के चीफ सुपरिटेंडेंट थे। जांच में यह भी आरोप सामने आया कि उन्होंने कैदी को नियमों के विपरीत कई बार पैरोल देने में भूमिका निभाई और सत्यापन से जुड़े रिकॉर्ड में भी गड़बड़ी की गई।

ऐसे खुला पूरा मामला

करीब आठ साल बाद मई 2026 में जेल प्रशासन को फर्जी रिहाई आदेश की जानकारी मिली। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड से दस्तावेज का मिलान कराने पर पता चला कि शंकर की रिहाई के लिए ऐसा कोई आदेश जारी ही नहीं हुआ था। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और शंकर तथा जेल कर्मचारी श्रीकांत को गिरफ्तार किया। अब जांच का दायरा जेल के अन्य अधिकारियों और संभावित ऐसी दूसरी घटनाओं तक भी बढ़ाया जा रहा है।

पुलिस मामले में फर्जी दस्तावेज तैयार करने, अवैध रिहाई और जेल अधिकारियों की कथित भूमिका समेत सभी पहलुओं की जांच कर रही है। यौन शोषण से जुड़े आरोप भी जांच का हिस्सा हैं और इन आरोपों की पुष्टि जांच के जरिए होनी बाकी है।

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