रायपुर नगर निगम में शनिवार को हुई एक अहम बैठक में महापौर मीनल चौबे ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को सीधे कठघरे में खड़ा कर दिया। बैठक निगम मुख्यालय में आयोजित हुई, जिसमें बकाया राजस्व, टैक्स वसूली और लीज संपत्तियों से जुड़े मामलों की समीक्षा की जा रही थी।
चर्चा के दौरान जब यह सामने आया कि यूजर चार्ज पर ब्याज वसूला जा रहा है, तो महापौर ने तीखी नाराजगी जताते हुए अधिकारियों से सवाल किया कि आखिर किस नियम के तहत यह वसूली हो रही है। उनका कहना था कि जनता केवल टैक्स भरने के लिए नहीं है, उसे बदले में बेहतर नागरिक सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बकाया राशि जमा करने की प्रक्रिया आम नागरिकों के लिए आसान होनी चाहिए। इसके लिए दो प्रमुख निर्देश दिए गए
पार्ट-पेमेंट यानी किश्तों में भुगतान की व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाया जाए
ऑनलाइन भुगतान पोर्टल पर भी पार्ट-पेमेंट की सुविधा जल्द शुरू की जाए
महापौर ने यह भी कहा कि निगम का राजस्व बढ़ना जरूरी है, लेकिन यह वृद्धि नियम-सम्मत तरीके से होनी चाहिए, न कि नागरिकों पर अनुचित बोझ डालकर। बैठक में महापौर ने राजस्व अधिकारियों को सीधी हिदायत दी कि टैक्स वसूली से पहले उन्हें संबंधित अधिनियम की पूरी जानकारी होनी चाहिए। उनका कहना था कि जब तक अधिकारी खुद नियमों को ठीक से नहीं समझेंगे, तब तक गलत वसूली और नागरिकों की शिकायतों का सिलसिला नहीं थमेगा।
समीक्षा बैठक में निगम की उन संपत्तियों पर भी चर्चा हुई जिन्हें लीज पर दिया गया था, लेकिन जिनकी अवधि अब समाप्त हो चुकी है। महापौर ने इस मामले में साफ निर्देश दिया कि पहले नियमानुसार लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाए, और उसके बाद ही आगे की कोई कार्रवाई शुरू हो।यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया अटकी रहने से न सिर्फ निगम का राजस्व प्रभावित होता है, बल्कि संबंधित संपत्ति धारकों को भी असमंजस की स्थिति झेलनी पड़ती है।
बैठक में एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उन कॉलोनियों का रहा जिनका नगर निगम को अब तक विधिवत हैंडओवर हुआ है या नहीं, इसे लेकर स्पष्टता की कमी थी। महापौर ने निर्देश दिया कि हर ऐसी कॉलोनी की फाइल अलग से जांची जाए और निम्न बिंदुओं पर स्थिति साफ की जाए:
कॉलोनी का हैंडओवर हुआ है या प्रक्रियाधीन है
निगम वहां फिलहाल कौन-कौन सी सेवाएं दे रहा है
कर निर्धारण और वसूली किस आधार पर की जा रही है
इसके अलावा महापौर ने यह भी निर्देश दिया कि डायवर्सन की तारीख से ही कर निर्धारण की प्रक्रिया लागू की जाए, ताकि हिसाब-किताब में पारदर्शिता बनी रहे।
बैठक का सबसे चर्चित पहलू महापौर का यह बयान रहा कि नगर निगम की जिम्मेदारी केवल टैक्स वसूलना नहीं है। उनके मुताबिक, बेहतर सड़कें, नियमित जलापूर्ति, साफ-सफाई और अन्य बुनियादी नागरिक सुविधाएं मुहैया कराना भी निगम का उतना ही बड़ा दायित्व है।
उन्होंने अधिकारियों से यह भी कहा कि टैक्स और शुल्क से जुड़े नियम व स्लैब की जानकारी नागरिकों को सरल भाषा में उपलब्ध कराई जाए, ताकि आम लोगों को यह समझने में दिक्कत न हो कि उनसे कितना और किस आधार पर शुल्क लिया जा रहा है।
