कक्षा 9 की NCERT किताब में पहली बार शामिल हुआ ‘आपातकाल’ का अध्याय, देशभर में चर्चा

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नई दिल्ली, 25 जून 2026। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने नई शिक्षा नीति (NEP-2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-2023) के तहत कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की नई पुस्तक में पहली बार वर्ष 1975-77 के आपातकाल (Emergency) को विस्तार से शामिल किया है। इस बदलाव के बाद शिक्षा और राजनीतिक क्षेत्रों में नई बहस शुरू हो गई है।

NCERT की नई पुस्तक “Understanding Society: India and Beyond” में आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई प्रमुख चुनौतियों में से एक बताया गया है। पुस्तक में उल्लेख किया गया है कि उस दौरान कई मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे, प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई थी और कई राजनीतिक नेताओं को गिरफ्तार किया गया था।

अब तक आपातकाल का विषय मुख्य रूप से कक्षा 12 के राजनीति विज्ञान पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता था, लेकिन पहली बार इसे कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए शामिल किया गया है। NCERT के अनुसार इसका उद्देश्य छात्रों को लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक संस्थाओं और भारतीय राजनीतिक इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं से प्रारंभिक स्तर पर परिचित कराना है।

पुस्तक में लोकतंत्र की मजबूती, नागरिक अधिकारों और जन आंदोलनों की भूमिका पर भी चर्चा की गई है। साथ ही, लोकतंत्र की बहाली के लिए चलाए गए आंदोलन में जयप्रकाश नारायण की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने इस बदलाव का समर्थन करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को आपातकाल के दौर की जानकारी होना आवश्यक है, ताकि लोकतंत्र के महत्व को बेहतर ढंग से समझा जा सके।

वहीं कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों ने इस कदम पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इतिहास को संतुलित और निष्पक्ष दृष्टिकोण से पढ़ाया जाना चाहिए और किसी भी ऐतिहासिक घटना को राजनीतिक नजरिए से प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

इसके अलावा NCERT ने कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में अन्य बदलाव भी किए हैं। फ्रांसीसी क्रांति, रूसी क्रांति और नाजीवाद जैसे कुछ अध्यायों को कक्षा 10 में स्थानांतरित किया गया है, जबकि कक्षा 9 में भारतीय समाज, लोकतंत्र और प्राचीन सभ्यताओं पर अधिक जोर दिया गया है।

द हनी बैजर डेस्क: विशेषज्ञों का मानना है कि आपातकाल भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक रहा है। ऐसे में इसे विद्यालयी शिक्षा में शामिल करने से विद्यार्थियों को संविधान, नागरिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की बेहतर समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा।

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