एर्राबोर में जहां कभी गूंजती थी चीखें, वहां 20 साल बाद उठेगा तिरंगा का संदेश, आज विजय शर्मा ने बाइक रैली को किया रवाना

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नक्सल खात्में के बाद बदलते बस्तर की तस्वीर देखने को मिल रही है. जहां करीब दो दशक पहले जिस एर्राबोर ने नक्सली हिंसा की भयावहता देखी थी, आज वहीं इलाका तिरंगे के रंग में रंगता नजर आएगा. जुलाई 2006 में एर्राबोर के राहत शिविर पर हुए माओवादी हमले में महिलाओं और बच्चों समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों की जान गई थी,

जिनमें 33 आंकड़े सामने आते हैं. उस दौर में नक्सली हिंसा से बचने के लिए हजारों ग्रामीण राहत शिविरों में शरण लिए हुए थे. एर्राबोर भी ऐसे ही शिविरों में से एक था.20 साल बाद बदली एर्राबोर की तस्वीरजुलाई 2006 में माओवादियों ने शिविर पर हमला किया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मारे गए. इसके बाद यहां से 10 किलोमीटर दूर मनीकोंटा में भी नक्सलियों ने 16 ग्रामीणों को घेरकर मौत के घाट उतारा था. इस घटना ने पूरे बस्तर को झकझोर दिया था. अब करीब 20 साल बाद तस्वीर बदलती दिखाई दे रही है.विजय शर्मा ने बाइक पर निकाली तिरंगा यात्राआज एर्राबोर से उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा तिरंगा यात्रा की बाइक रैली को रवाना कर रहे हैं. वहीं चिंगावरम से वनमंत्री एवं सुकमा प्रभारी मंत्री केदार कश्यप रैली लेकर निकले हैं.

दोनों रैलियां दोरनापाल में एक साथ होंगी और इसके बाद पोलमपल्ली, चिंतागुफा, जगरगुंडा और सिलगेर होते हुए बीजापुर की ओर बढ़ेंगी.बस्तर के 92 गांवों में पहली बार लहराएगा तिरंगावहीं एर्राबोर समेत इस स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार बीजापुर, सुकमा और नारायणपुर ज़िलों के 92 दूर-दराज़ गांवों में तिरंगा फहराया जाएगा. ये वे इलाके हैं जो दशकों से नक्सली आतंक और डर के साये में रहे हैं. आज़ादी के बाद यह पहला मौका है जब इन इलाकों के ग्रामीण और बच्चे औपचारिक रूप से स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे. इनमें सुकमा के 50, बीजापुर के 33 और नारायणपुर के 9 गांव शामिल हैं.

गृह मंत्री विजय शर्मा ने दी जानकारीगृह मंत्री विजय शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस 15 अगस्त को बीजापुर के 33 गांवों में पहली बार झंडा फहराया जाएगा. सुकमा जिले में ऐसे 50 गांव होंगे जहां इस दिन पहली बार झंडा फहराने का कार्यक्रम होगा. इसी तरह नारायणपुर जिले में 9 गांवों में पहली बार झंडा फहराया जाएगा.डिप्टी CM और गृह मंत्री विजय शर्मा ने आगे बताया कि इन सभी गांवों में झंडा फहराने की तैयारी की जा रही है. इससे पहले जिन गांवों में झंडा फहराया गया था, उन्हें भी इसमें शामिल किया गया है. यह अभियान बस्तर डिवीजन के उन गांवों तक भी बढ़ाया जाएगा जहां नक्सली हमले या मुठभेड़ जैसी बड़ी घटनाएं हुई हैं.

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