77 दिन तक बिना बताए ड्यूटी से गायब रहा आरक्षक, SP ने किया बर्खास्त; पहले भी पांच बार रहा अनधिकृत अनुपस्थित

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बेमेतरा पुलिस ने 77 दिनों तक बिना अनुमति ड्यूटी से गायब रहने वाले आरक्षक विवेक पोद्दार को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभागीय जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद एसपी त्रिलोक बंसल ने कार्रवाई करते हुए अनुपस्थिति की अवधि को ‘कार्य नहीं, वेतन नहीं’ के सिद्धांत के तहत अवैतनिक घोषित किया।

पुलिस विभाग में अनुशासनहीनता के खिलाफ सख्त संदेश देते हुए बेमेतरा पुलिस ने 77 दिनों तक बिना अनुमति ड्यूटी से गायब रहने वाले आरक्षक विवेक पोद्दार को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभागीय जांच में आरोप सिद्ध होने के बाद एसपी त्रिलोक बंसल ने बर्खास्तगी का आदेश जारी किया। साथ ही अनुपस्थिति की पूरी अवधि को ‘कार्य नहीं, वेतन नहीं’ के सिद्धांत के तहत अवैतनिक घोषित किया गया है।

पुलिस विभाग के अनुसार आरक्षक विवेक पोद्दार की ड्यूटी 3 जून 2025 को बंदी पेशी के लिए लगाई गई थी, लेकिन वह उसी दिन से बिना किसी सक्षम अनुमति और बिना विभाग को विधिवत सूचना दिए ड्यूटी से अनुपस्थित हो गया। वह 3 जून से 18 अगस्त 2025 तक लगातार 77 दिनों तक ड्यूटी पर नहीं लौटा। इस दौरान विभाग ने कई बार नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा और ड्यूटी पर उपस्थित होने के निर्देश दिए, लेकिन उसने संतोषजनक जवाब नहीं दिया। विभागीय जांच के दौरान आरक्षक को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया गया, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों, दस्तावेजों और सेवा अभिलेखों के आधार पर आरोप प्रमाणित पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि उसका पूर्व सेवा रिकॉर्ड भी अनुशासनहीनता से जुड़ा रहा है


रिकॉर्ड के मुताबिक विवेक पोद्दार को पहले ही तीन छोटी और एक बड़ी विभागीय सजा मिल चुकी थी। अंतिम अवसर देते हुए उसकी वेतन वृद्धि भी रोकी गई थी, लेकिन उसके व्यवहार में कोई सुधार नहीं आया। सेवाकाल के दौरान वह पांच बार अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहा। इसके अलावा उसके खिलाफ दो आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं तथा एक अन्य विभागीय जांच जिला दुर्ग में अभी भी लंबित है। हालांकि इन मामलों का वर्तमान कार्रवाई से सीधा संबंध नहीं है, लेकिन विभाग ने इन्हें उसके समग्र सेवा आचरण का हिस्सा माना।

एसपी त्रिलोक बंसल ने कहा कि पुलिस जैसी अनुशासित सेवा में कर्तव्य के प्रति लापरवाही और अनधिकृत अनुपस्थिति किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग में अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है और भविष्य में भी ऐसे मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

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