भारत सरकार पुराने ‘नेट न्यूट्रैलिटी’ नियमों की समीक्षा करने पर विचार कर रही है, जिससे देश में इंटरनेट के नियमों में बड़ा बदलाव आ सकता है। अगर ये नए बदलाव लागू होते हैं, तो Jio, Airtel और Vi जैसी टेलीकॉम कंपनियां गेमिंग, हेल्थकेयर, ऑटोनॉमस गाड़ियों और स्मार्ट फैक्ट्रियों जैसी खास सेवाओं के लिए सामान्य यूजर्स और कंपनियों से अलग-अलग चार्ज वसूल सकेंगी।
देश में इंटरनेट के नियमों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार अब बरसों पुराने ‘नेट न्यूट्रैलिटी’ (Net Neutrality) नियमों को रिव्यू करने की तैयारी में है। अगर यह बदलाव लागू होता है, तो टेलीकॉम कंपनियां अलग-अलग इंटरनेट स्पीड और सेवाओं के हिसाब से यूजर्स और कंपनियों से अलग-अलग चार्ज वसूल सकेंगी। ET की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इंटरनेट इस्तेमाल करने के नियम जल्द ही बदल सकते हैं। सरकार काफी पुराने ‘नेट न्यूट्रैलिटी’ नियमों को बदलने पर विचार कर रही है। अगर यह नया नियम लागू होता है, तो टेलीकॉम कंपनियां जैसे Jio, Airtel, Vi अलग-अलग ऐप्स, गेमिंग, वीडियो स्पीड या स्पेशल सर्विस के हिसाब से आपसे और कंपनियों से अलग-अलग पैसे वसूल सकेंगी। आइये, डिटेल में जानते हैं।

सरकार नेट न्यूट्रैलिटी नियमों को जांचने पर विचार कर रही है। इसके तहत टेलीकॉम कंपनियों को अलग-अलग तरह की कनेक्टिविटी या इंटरनेट स्पीड देने और गेमिंग, हेल्थकेयर, ऑटोनॉमस गाड़ियां और स्मार्ट फैक्ट्रियों जैसी खास सर्विस के लिए आम मोबाइल यूजर्स और कंपनियों से अलग-अलग रेट वसूलने की इजाजत मिल सकती है। मौजूदा नियम टेलीकॉम कंपनियों को ऐसी सेवाएं देने से रोकते हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी में तेजी से हो रहे बदलावों खासकर 5G स्लाइसिंग की वजह से मौजूदा नेट न्यूट्रैलिटी नियम बहुत सख्त और पुराने लगने लगे हैं।

- नेट न्यूट्रैलिटी (Net Neutrality) का मतलब है कि इंटरनेट पर बिना किसी भेदभाव के सभी के साथ एक समान बर्ताव करना।
- इसका सीधा सा नियम यह है कि टेलीकॉम या इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां जैसे Jio, Airtel, Vi सभी तरह के ऐप्स, वेबसाइट्स और ऑनलाइन कंटेंट को एक जैसी स्पीड और प्राथमिकता देंगी।
- इस नियम के तहत कंपनियां अपनी मर्जी से किसी खास ऐप की स्पीड धीमी या तेज नहीं कर सकतीं, ना ही किसी सर्विस को जानबूझकर ब्लॉक कर सकती हैं और ना ही पैसे लेकर किसी कंपनी के ट्रैफिक को स्पेशल फास्ट-लेन दे सकती हैं। यानी पूरे इंटरनेट पर हर यूजर और हर ऐप के लिए एक ही निष्पक्ष नियम लागू होता है।

हालांकि, 2022 में देश में 5G सर्विस शुरू होने के बाद से नियमों के लागू होने को लेकर खासकर 5G स्लाइसिंग के मामले में कन्फ्यूजन और अस्पष्टता पैदा हो गई है, जिससे सरकार को इस पर दोबारा विचार करना पड़ रहा है। मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि उन्होंने टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) को इस मामले पर काम करने और यह सुझाव देने के लिए कहा है कि नेट न्यूट्रैलिटी नियमों में क्या बदलाव शामिल किए जाने चाहिए, क्योंकि अभी इसकी जानकारी पब्लिक नहीं है।

