केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी। उन्होंने कहा कि यह फैसला देश के छात्रों के भविष्य की रक्षा और दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन का फायदा उठाने की कोशिश कर रही “राष्ट्र-विरोधी ताकतों” को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल था। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विस्तृत पोस्ट के माध्यम से देश के युवाओं को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे की जानकारी दी। यह घोषणा केंद्र सरकार और आंदोलनकारी संगठन Cockroach Janta Party (CJP) के बीच तीसरे दौर की वार्ता से कुछ घंटे पहले की गई।
वार्ता से पहले CJP नेताओं ने स्पष्ट कर दिया था कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी “गैर-समझौतावादी” मांग है। इसके कुछ घंटे बाद प्रधान ने अपने पद से हटने का ऐलान कर दिया।
अपने संदेश में उन्होंने कहा कि पद छोड़ना व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं, बल्कि छात्रों के हित में लिया गया एक आवश्यक निर्णय है। उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों की घटनाओं ने उन्हें बेहद दुखी किया है। विशेष रूप से 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान हुई हिंसा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं शिक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंता का विषय हैं।
धर्मेंद्र प्रधान हाल के महीनों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर NEET पेपर लीक विवाद, को लेकर विपक्ष और छात्रों के निशाने पर रहे थे।

