बिलासपुर: न्यायधानी में लगातार सामने आ रही डाग बाइट की घटनाओं के बीच अब स्कूल भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर सक्रिय हो गए हैं। डीएवी पब्लिक स्कूल, वसंत विहार, आंध्र समाज स्कूल रेलवे, भारत माता अंग्रेजी माध्यम स्कूल रेलवे ने पत्र जारी कर विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए विस्तृत सुरक्षा दिशा-निर्देश (एसओपी) जारी किए हैं।
अभियान के बीच स्कूल की यह पहल शहर में बढ़ती चिंता के प्रति गंभीरता का संदेश देती है।पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। सक्षम अधिकारियों के निर्देशों के अनुरूप स्कूल ने अभिभावकों से बच्चों को आवारा कुत्तों के आसपास सुरक्षित व्यवहार की जानकारी देने का आग्रह किया है। एसओपी में बच्चों को सलाह दी गई है कि यदि कोई आवारा कुत्ता पास आए तो शांत रहें, बिना दौड़े धीरे-धीरे वहां से हट जाएं और स्कूल या आसपास कहीं भी आवारा कुत्ते दिखने पर शिक्षक अथवा किसी जिम्मेदार वयस्क को तुरंत जानकारी दें।

साथ ही अज्ञात जानवरों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और शिक्षकों के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है। सर्कुलर में यह भी स्पष्ट किया गया है कि बच्चे किसी भी आवारा कुत्ते को छेड़ें नहीं, पत्थर न मारें, खाने या सोने के दौरान उन्हें परेशान न करें तथा उनके साथ खेलने या उन्हें खिलाने का प्रयास न करें। यदि कुत्ता काट ले तो घाव को कम से कम 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से धोने, तत्काल अस्पताल पहुंचने, एंटी रैबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने और स्कूल को सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं। अभिभावकों से भी बच्चों को इन सावधानियों की जानकारी देने तथा किसी भी घटना की तत्काल सूचना स्कूल को देने का आग्रह किया गया है।

स्कूल की एसओपी केवल सावधानी तक सीमित नहीं है, व्यवहारिक प्रशिक्षण पर भी आधारित है। बच्चों को दौड़ने, चिल्लाने, कुत्तों को छूने, खिलाने, पत्थर मारने या लड़ रहे कुत्तों के बीच जाने से मना किया गया है। वहीं किसी भी डाग बाइट की स्थिति में घरेलू उपचार से बचने, तुरंत घाव धोने, चिकित्सकीय उपचार लेने और एंटी रैबीज वैक्सीन लगवाने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

शहर में लगातार बढ़ रही डाग बाइट की घटनाओं को लेकर नईदुनिया लगातार आवारा आतंक अभियान चला रहा है। अभियान के तहत प्रभावित क्षेत्रों, नागरिकों की परेशानी, नगर निगम की व्यवस्था और समाधान से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है। अब स्कूलों द्वारा भी सुरक्षा संबंधी एसओपी जारी किया जाना इस बात का संकेत है कि यह समस्या केवल सड़कों तक सीमित नहीं, बच्चों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा गंभीर सामाजिक विषय बन चुकी है। बता दें कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट भी लगातार नजर रखे हुए है।

