धर्म में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। शिवलिंग पर जल, बेलपत्र, दूध और भस्म अर्पित करने के साथ-साथ भांग और धतूरा चढ़ाने की भी परंपरा सदियों से चली आ रही है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर भगवान शिव को भांग और धतूरा ही क्यों अर्पित किया जाता है? इसके पीछे धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं का गहरा संबंध बताया गया है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल नामक विष निकला तो उसकी ज्वाला से संपूर्ण सृष्टि संकट में आ गई। तब भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए उस विष का पान कर लिया। विष के प्रभाव से उनके शरीर में अत्यधिक गर्मी उत्पन्न हो गई।
मान्यता है कि उस समय देवताओं ने भगवान शिव को शीतलता प्रदान करने के लिए भांग, धतूरा, बेलपत्र और जल अर्पित किया। तभी से शिव पूजा में इन वस्तुओं का विशेष महत्व माना जाने लगा।धार्मिक मान्यता यह भी है कि धतूरा एक विषैला पौधा है, लेकिन भगवान शिव ने स्वयं विष को धारण किया था।
इसलिए उन्हें धतूरा अर्पित करना इस बात का प्रतीक माना जाता है कि वे जीवन के नकारात्मक तत्वों को भी अपने भीतर समाहित कर संसार का कल्याण करते हैं।भांग को भी भगवान शिव का प्रिय प्रसाद माना जाता है। हालांकि धर्मग्रंथों में कहीं भी सामान्य लोगों को नशा करने की प्रेरणा नहीं दी गई है। पूजा में भांग चढ़ाने की परंपरा केवल धार्मिक आस्था और प्रतीकात्मक महत्व से जुड़ी हुई मानी जाती है।
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन, महाशिवरात्रि और सोमवार के दिन श्रद्धापूर्वक भगवान शिव को भांग, धतूरा, बेलपत्र और जल अर्पित करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख-शांति और सकारात्मकता का संचार होता है।धार्मिक विषयों से जुड़ी ये मान्यताएं आस्था पर आधारित हैं। अलग-अलग परंपराओं और क्षेत्रों में इनके बारे में विभिन्न मान्यताएं प्रचलित हो सकती हैं।

